प्यार और धोखा Hindi Story with Moral – Episode – 1:

Hindi Story with Moral – Love Story in Hindi – Real Sad Love Story in Hindi – Romantic Love Story in Hindi

Hindi Story with Moral – प्यार और धोखा एक सच्ची प्रेम कहानी है, जिसमें नूरी और आरिफ एक दूसरे से बेहद मोहब्बत करते हैं। लेकिन नूरी के घर में Love Marriage नहीं होती, इसलिए नूरी आरिफ से कहती है कि “तुम मुझे भूल जाओ”। लेकिन आरिफ नूरी से सच्ची मोहब्बत करता है, इसलिए वह लव मैरिज को Arrange Marriage दिखाने के लिए अपने माँ-बाप को उसके घर भेजता है रिश्ते के लिए। दोनों का रिश्ता फिक्स हो जाता है और शादी होने वाली रहती है। लेकिन ऐसा क्या होता है कि दोनों की शादी नहीं हो पाती….

18 साल की उम्र में नूरी को आरिफ़ नाम के लड़के से प्यार हो जाता है। आरिफ़ भी नूरी को उतना ही प्यार करता था, जितना कि नूरी। दोनों की घंटों फ़ोन पर बातें होती थीं। दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते थे। आरिफ़ तो किसी तरह अपने घर वालों को उन दोनों की शादी के लिए मना लेता। लेकिन नूरी के घर वाले उन दोनों की मोहब्बत को कभी स्वीकार नहीं करेंगे यह बात नूरी को अच्छी तरह पता थी।

Hindi Story with Moral

नूरी गमगीन होकर आरिफ़ से – “मेरे घर वाले कभी हमारे प्यार को नहीं समझेंगे। हम जितना एक दूसरे के करीब आएंगे, उतनी ही बाद में तकलीफ़ होगी। इसलिए तुम मुझे भूल जाओ, इसी में हमारी भलाई है।”

आरिफ़ नूरी से – “नहीं नूरी ऐसा न कहो, मैं तुम्हें भूल जाऊं यह तो हो ही नहीं सकता। हमने जो वक्त साथ बिताया, जो वादे किए एक दूसरे से, जो कसमें खाई, उन्हें मैं कैसे भूल सकता हूँ। तुम्हीं बताओ तुम कैसे भूल सकती हो वो सबकुछ? क्या तुम भूल पाओगी? क्या आसान होगा तुम्हारे लिए?

नूरी आरिफ़ से रोते हुए – “हां मुश्किल है थोड़ा, लेकिन नामुमकिन नहीं। हमारी मोहब्बत सरे आम रुसवा न हो इसलिए यही बेहतर है कि हम दोनों एक दूसरे से दूर हो जाएं।

आरिफ़ नूरी को दिलासा देते हुए कहता है – “तुम परेशान न हो नूरी, मैं सबकुछ संभाल लूंगा। मैं तुम्हारे घर वालों से खुद हमारी शादी की बात करूंगा, Don’t Worry।”

नूरी – “तुम कितनी भी कोशिश कर लो, वो इस शादी के लिए कभी नहीं मानेंगे और वो मुझे ही गलत समझेंगे। ऊपर से बदनामी जो होगी वह अलग। मैं ये सब नहीं सह पाऊंगी”।

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आरिफ़ – “क्यों न हम कुछ ऐसा करें जिससे बात भी बन जाए और तुम्हारा नाम भी बदनाम न हो”।

नूरी – “क्या ऐसा मुमकिन है”?

आरिफ़ – “बिल्कुल मुमकिन है। मैं अपने घर वालों को हमारी शादी के लिए मनाऊंगा और उन्हें तुम्हारे घर पूरी इज़्ज़त के साथ रिश्ता लेकर भेजूंगा। फिर उन्हें यह यकीन हो जाएगा कि यह Love नहीं Arrange Marriage है। और तुम्हारे घर वाले मान जाएंगे”।

नूरी – “ठीक है तुम यह कोशिश करके भी देख लो। काश खुदा हम पर मेहरबान हो जाए”।

आरिफ़ जैसे तैसे अपने घर वालों को शादी के लिए मनाता है। उसके घर वाले अपने बेटे की खुशी के लिए मान तो जाते हैं, लेकिन उनके दिल में लड़की को लेकर अभी भी कड़वाहट रहती है। और वही कड़वाहट लिए 3 दिन के बाद आरिफ़ की अम्मी रिश्ता लेकर नूरी के घर पहुंचती हैं।

आरिफ़ की अम्मी नूरी की अम्मी से – “हमें आपकी नूरी पसंद है, हम उसके लिए अपने आरिफ़ का रिश्ता लेकर आए हैं। क्या आपको मंजूर है”?

नूरी की अम्मी – “नहीं मैं अभी अपनी बेटी की शादी नहीं कर सकती, क्योंकि अभी वह छोटी है और पढ़ाई कर रही है”।

इसपर आरिफ़ की अम्मी को काफ़ी गुस्सा आ जाता है और वह अपने दिल की कड़वाहट को रोक नहीं पाती। और नूरी की अम्मी से गुर्राकर कहती हैं –

“छोटी थी फिर भी इतने बड़े – बड़े कांड कर बैठी”।

नूरी की अम्मी हैरानी से – “क्या किया है मेरी बेटी ने”?

आरिफ़ की अम्मी – “उसने मेरे बेटे को फंसाया है और उसी के कहने पर मैं आज यहां पर आपकी नूरी का रिश्ता मांगने आई हूं”।

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नूरी की अम्मी – “मेरी बेटी ऐसा नहीं कर सकती, आपको कोई गलतफहमी हुई है। अभी मैं उसे बुलाती हूं और पूछती हूं कि क्या यह सच है”?

नूरी की अम्मी नूरी को आवाज़ देकर बुलाती हैं और नूरी आ जाती है।

नूरी घबराते हुए – “जी अम्मी क्या हुआ, आपने मुझे बुलाया”?

नूरी की अम्मी गुस्से में – “यह बताओ नूरी आरिफ़ की अम्मी जो कह रही हैं क्या यह सच है? क्या तुम्हारा और आरिफ़ का कुछ चल रहा है? क्या तुम उससे शादी करना चाहती हो”?

नूरी उस टाइम बहुत घबरा जाती है और डर की वजह से सच नहीं बोल पाती।

नूरी डरते हुए – “नहीं अम्मी ऐसा कुछ भी नहीं है। मेरा और उसका कोई चक्कर (Affair) नहीं है”।

नूरी की अम्मी आरिफ़ की अम्मी से – “देखा मेरी बेटी बेकसूर है, उसकी तरफ से आरिफ़ के लिए कोई प्यार या लगाओ नहीं है। अब आप जा सकती हैं, मैं अपनी बेटी का रिश्ता आपके यहां हरगिज़ नहीं कर सकती”।

इतना कहकर नूरी की अम्मी आरिफ़ की अम्मी को वापस तो भेज देती हैं। लेकिन नूरी दिल ही दिल में आरिफ़ को खो देने के ख्याल से डर जाती है। मानों जैसे उसके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई हो। वह अपनी अम्मी के सामने तो नहीं लेकिन अपने रूम में जाकर बहुत देर तक रोती रहती है। बाहर बादल भी ज़ोर ज़ोर से गरजने लगते हैं और तेजी से बारिश होने लगती है। ऐसा लगता है जैसे वो भी नूरी के दर्द को महसूस करके अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रहे हैं।

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